पॉलीहाउस खेती क्या है? Polyhouse farming kya hai?

क्या आप पॉलीहाउस खेती के बारे में जानकारी चाहते है? पॉलीहाउस खेती एक आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है जो फसलों की उच्च गुणवत्ता और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उपयोगी होती है।

यहाँ पर हमने पॉलीहाउस खेती क्या है कैसे करे के बारे में, Polyhouse Farming kya hai, Polyhouse Farming kaise kare आदि के बारे में बात करेंगे।

पॉलीहाउस खेती क्या है? Polyhouse farming kya hai?

पॉलीहाउस खेती क्या है? Polyhouse Farming Kya hai?

पॉलीहाउस खेती एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें वनस्पतियों को खुले आसमान के तहत बनाए गए विशेष प्रकार के शीतल स्थानों में उगाया जाता है। इस पद्धति में समुचित तापमान, नमी और खाद उपलब्ध कराकर वनस्पतियों के विकास और उत्पादन को बढ़ावा दिया जाता है। पॉलीहाउस खेती नियंत्रित माहौल में साल भर में विभिन्न प्रकार की सब्जियों, फूलों, और पौधों के उत्पादन के लिए एक सुरक्षित और आधुनिक विकासी वातावरण प्रदान करती है।

पॉलीहाउस खेती की इतिहास (Journey of Polyhouse)

पॉलीहाउस खेती की शुरुआत ब्रिटिश भारत में 17वीं शताब्दी में डॉ. नेथनियल बग्शॉट द्वारा की गई थी। इसके बाद समय के साथ, यह विधि अन्य देशों में भी प्रचलित हुई और 19वीं शताब्दी में जर्मनी के खेती विज्ञानी जुलियस वॉन सैक्स ने इसे और विकसित किया। आजकल, पॉलीहाउस खेती विश्वभर में व्यापक रूप से अपनाई जा रही है और कृषि क्षेत्र में वनस्पतियों के उत्पादन में सुधार का साधन बन रही है।

पॉलीहाउस खेती के इतिहास ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाई है। इस विधि के उपयोग से वनस्पतियों के उत्पादन में सुधार होता है और खेती में उच्च उत्पादकता प्राप्त की जाती है। इसके फायदे किसानों के लिए अनमोल हैं जो अधिकतम मुनाफा कमाना चाहते हैं और खेती को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करना चाहते हैं।

पॉलीहाउस खेती द्वारा सुरक्षित वातावरण में वनस्पतियों को उगाने की तकनीक ने खेती की उत्पादकता में वृद्धि के लिए एक नया मार्ग प्रदर्शित किया है। इस विधि के माध्यम से किसान अपनी फसलों का अधिक से अधिक सुरक्षित उत्पादन करते हैं और खेती में अधिकतम लाभ प्राप्त करते हैं। इससे कृषि क्षेत्र में विकास होता है और देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

इस तरह, पॉलीहाउस खेती का इतिहास विश्व कृषि में एक महत्वपूर्ण चरण है जो खेती को आधुनिक तकनीकों से समृद्ध करता है और किसानों को अधिकतम लाभ प्रदान करता है। यह खेती की विकसित प्रक्रिया है जो कृषि सेक्टर को नए दिशानिर्देश में ले जा रही है।

पॉलीहाउस के प्रकार (Types of Polyhouse)

पॉलीहाउस के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य प्रकार हैं: सादा पॉलीहाउस, शीतल पॉलीहाउस, और नेतृत्व पॉलीहाउस। सादा पॉलीहाउस उच्च तापमान और नमी स्तर पर पौधों के विकास के लिए उपयुक्त होता है। शीतल पॉलीहाउस उच्च तापमान और कम नमी स्तर को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त होता है और नेतृत्व पॉलीहाउस बड़े पॉलीहाउस के एक बड़े हिस्से के तहत बनाए जाते हैं, जो आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के साथ विकसित होते हैं।

पॉलीहाउस खेती कैसे करे (Polyhouse Farming Kaise Kare)

स्थल चयन:

पॉलीहाउस खेती के लिए सही स्थान का चयन करना बहुत महत्वपूर्ण है। स्थान के चयन में मौसमी और भौगोलिक शर्तें, मिट्टी की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता, और पॉलीहाउस के लिए उपयुक्त संरचना का ध्यान रखना आवश्यक होता है। साथ ही, वनस्पतियों के विकास के लिए सबसे अनुकूल तापमान और उच्च उत्तरी और दक्षिणी पूर्वी दिशा वाले स्थानों की प्राथमिकता देना चाहिए।

बजट निर्धारण:

पॉलीहाउस खेती की योजना बनाने के लिए उचित बजट निर्धारित करना बहुत महत्वपूर्ण है। बजट में सभी आवश्यक खर्च, जैसे कि पॉलीहाउस की निर्माण की लागत, सामग्री, पानी का खर्च, कृषि उपकरणों की खरीद, कामगारों की वेतन, आदि को शामिल करना चाहिए। बजट निर्धारित करते समय, संभावित आय और खर्च के बारे में सोचकर और संभावित आपूर्ति समस्याओं का ध्यान रखते हुए योजना तैयार करना चाहिए।

विभिन्न पादपों का चयन:

पॉलीहाउस खेती के लिए विभिन्न प्रकार के पादप चुनना आवश्यक होता है। वनस्पतियों के चयन में उनके विकास समय, मार्गदर्शक तापमान, विशेष उत्पादन दृष्टिकोन, बाजार डिमांड, और किसान के योग्यता आदि का ध्यान रखना चाहिए। आम तौर पर, तम्बाकू, गुलाब, गेंदा, टमाटर, शिमला मिर्च, फूलों के उत्पादन के लिए जीवनकारी और प्रौद्योगिकियों का चयन किया जाता है।

प्रकृति के अनुरूप पॉलीहाउस खेती योजना:

पॉलीहाउस खेती के लिए एक सफल योजना बनाते समय प्रकृति के अनुरूपता का ख्याल रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वनस्पतियों के विकास के लिए उचित तापमान, उपयुक्त नमी स्तर, और उचित रोशनी की व्यवस्था करने के लिए पॉलीहाउस का निर्माण करना चाहिए। साथ ही, खेतों की चारों ओर संरचित और सुरक्षित तरीके से व्यवस्था करके प्राकृतिक तटस्थता को संरक्षित रखना चाहिए।

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पॉलीहाउस खेती के लिए उपयुक्त पादप:

सब्जियों का उत्पादन:

पॉलीहाउस खेती में सब्जियों का उत्पादन अत्यंत लाभकारी होता है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, गाजर, गोभी, ब्रोकोली, फूलगोभी, आदि कुछ प्रमुख सब्जियों में से हैं जो पॉलीहाउस में उत्पादित की जाती हैं। इनमें वनस्पतियों का विकास बेहद उच्च होता है और उन्हें अनुकूल तापमान और नमी मिलती है।

फूलों का उत्पादन:

पॉलीहाउस खेती में फूलों का उत्पादन भी एक मुनाफे का धंधा है। गुलाब, गेंदा, बेला, कटहल, और लिली जैसे अनेक प्रकार के फूल पॉलीहाउस में उगाए जाते हैं। ये फूल बगीचों, मंदिरों, होटलों, और विवाहों में उपयोग होते हैं, जिससे उत्पादकों को अच्छी आय मिलती है।

पौधों का उत्पादन:

पॉलीहाउस में पौधों का उत्पादन भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से, तम्बाकू, आलोवेरा, नीम, और सतावरी जैसे पौधे पॉलीहाउस में उगाए जाते हैं। इन पौधों का उत्पादन आयुर्वेदिक औषधि उत्पादन और खेती के लिए उपयोग होता है।

पॉलीहाउस के लिए संचालन और देखभाल:

समय सारणी तैयार करना:

पॉलीहाउस में समय सारणी तैयार करना बहुत महत्वपूर्ण है। वनस्पतियों के विकास और उत्पादन को ध्यान में रखते हुए, सभी कार्यों को समय सारणी में सम्मिलित करना चाहिए। समय सारणी बनाते समय पॉलीहाउस की विशेषताओं, वनस्पतियों के प्रकार, और तापमान आदि का ध्यान रखना चाहिए।

समय समय पर सिंचाई और खाद देना:

पॉलीहाउस में समय समय पर सिंचाई और खाद देना वनस्पतियों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उचित सिंचाई व खाद से वनस्पतियों को पोषण मिलता है और उनका विकास बेहतर होता है। इसके लिए नियमित रूप से जल और खाद की आपूर्ति करना चाहिए और वनस्पतियों की आवश्यकतानुसार इसे बढ़ाया जा सकता है।

रोगों और कीटाणुओं का प्रबंधन:

पॉलीहाउस में वनस्पतियों को रोगों और कीटाणुओं से बचाने के लिए उचित प्रबंधन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वनस्पतियों के विकास के लिए स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण बनाए रखना चाहिए और उचित रूप से रोगों और कीटाणुओं के नियंत्रण के लिए उपयुक्त रोगनाशक और कीटनाशक उपयोग करना चाहिए।

तापमान और आवश्यकतानुसार ध्यान देना:

पॉलीहाउस में तापमान और आवश्यकतानुसार ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है। वनस्पतियों के विकास के लिए उचित तापमान बनाए रखना जरूरी है और यह वनस्पतियों के प्रकार और मौसम के अनुसार बदल सकता है। तापमान के अनुसार वनस्पतियों की देखभाल करने से उनके उत्पादन में सुधार होता है और उन्हें अधिकतम मुनाफा मिलता है।

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पोलीहॉउस खेती के लिए सरकारी मदद

पोलीहाउस खेती वृद्धि के लिए भारतीय सरकार ने कई योजनाएं और उपायों को शुरू किया है, जिनसे किसानों को बेहतर मदद मिल सकती है। यहां कुछ सरकारी मदद योजनाएं हैं जो पोलीहाउस खेती करने वाले किसानों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं:

  1. राष्ट्रीय पोलीहाउस विकास योजना: भारत सरकार द्वारा यह योजना पोलीहाउस खेती को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई है। इसमें पोलीहाउस के निर्माण, उन्नत तकनीक, बीज विकास, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बीमा सहित विभिन्न आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है।
  2. कृषि ऋण योजनाएं: भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय बैंकों के माध्यम से पोलीहाउस खेती करने वाले किसानों को विशेष ऋण योजनाएं प्रदान की जाती हैं। इसके माध्यम से उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण मिलता है जिससे उन्हें अधिक उत्पादन करने में मदद मिलती है।
  3. कृषि सब्सिडी: भारत सरकार द्वारा पोलीहाउस खेती करने वाले किसानों को कृषि उपकरण, खाद्य उपयोगिताएं और बीजों के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे उन्हें उचित भाव में विभिन्न सामग्री प्राप्त होती है, जो उनके उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक साबित होती है।
  4. शिक्षा और प्रशिक्षण: सरकारी द्वारा पोलीहाउस खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण के लिए विभिन्न कृषि विद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों में भेजा जा सकता है। यह पोलीहाउस खेती को बेहतर तकनीक और अनुभव से समृद्ध बनाने में मदद कर सकता है।

इन सरकारी योजनाओं का उपयोग करके पोलीहाउस खेती करने वाले किसान अपनी खेती को उत्पादकता और लाभदायक बना सकते हैं। वे अपने नजदीकी कृषि विभाग या बैंक से संपर्क करके इन योजनाओं का लाभ ले सकते है।

पॉलीहाउस में उगायी जानें वाली फसलें

नीचे दिए गए टेबल में पॉलीहाउस में उगाई जाने वाली फसलों की पूरी सूची शामिल है:

फसलउपयुक्त तापमान (डिग्री सेल्सियस)आवश्यक आहारक तत्वसमय अवधि (दिन)
टमाटर20-30नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम90-150
शिमला मिर्च20-30नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम90-150
गोभी15-20नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम80-120
ककड़ी25-35नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम80-110
पत्ता गोभी15-25नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम70-100
गाजर10-20नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम100-150
प्याज15-25नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम90-150
आलू20-30नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम90-150
फूलगोभी15-20नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम80-120
पपीता25-35नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम120-180
बैंगन20-30नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम100-150
फल की सब्जियांविभिन्नविभिन्नविभिन्न

कृपया ध्यान दें कि फसलों के विकास और प्रगति को ध्यान में रखते हुए, उचित तापमान और आहारक तत्व का सेवन सुनिश्चित करें। पॉलीहाउस के भीतर वातावरण को समर्थन करने के लिए उचित समय अवधि के बाद फसलों को बढ़ावा देना चाहिए।

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पॉली हाउस बनाने में खर्च और सब्सिडी

पॉलीहाउस बनाने के लिए खर्च और सब्सिडी के बारे में निम्नलिखित है:

  1. खर्च: पॉलीहाउस बनाने का खर्च विभिन्न तत्वों पर निर्भर करता है, जैसे उपयुक्त ढांचा, आकार, उपयुक्त सामग्री, उपयुक्त संरचना, विद्युत संयंत्र, और सामान्य संरक्षण इत्यादि। एक साधारण अनुमान के अनुसार, एक छोटे साइज़ के पॉलीहाउस का खर्च लागभग 5 लाख से 10 लाख रुपये तक हो सकता है, जबकि बड़े पॉलीहाउस के लिए खर्च 20 लाख से 50 लाख रुपये तक हो सकता है।
  2. सब्सिडी: सरकार विभिन्न कृषि विभागों के माध्यम से किसानों को पॉलीहाउस के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है। इसके तहत, किसानों को पॉलीहाउस के बनाने के लिए आर्थिक सहायता, सब्सिडी या कर्ज की अनुदान भी दी जा सकती है। सब्सिडी के लिए पात्रता के लिए स्थानीय कृषि विभाग या सरकारी योजनाओं के तहत आवेदन करना आवश्यक हो सकता है।

खर्च और सब्सिडी की जानकारी आपके शहर, राज्य या देश के अनुसार भिन्न हो सकती है, इसलिए आपको स्थानीय कृषि विभाग या आधिकारिक सरकारी स्रोतों से जानकारी प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

पॉलीहाउस खेती के लाभ:

समृद्ध उत्पादन:

पॉलीहाउस खेती से समृद्ध उत्पादन होता है। वनस्पतियों को उचित तापमान, नमी, खाद, और सिंचाई के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है, जिससे उनका विकास बेहतर होता है और उनसे अधिक मुनाफा होता है। इससे किसानों को अधिक आय मिलती है और खेती में उनका मनोबल बढ़ता है।

वार्षिक उत्पादन:

पॉलीहाउस खेती में समृद्ध वार्षिक उत्पादन होता है। वनस्पतियों के संरक्षित वातावरण में, वे अपनी सारी विकास अवधि में फल, फूल, या सब्जियों को उत्पन्न करते हैं। इससे वनस्पतियों के उत्पादन की संख्या में वृद्धि होती है और किसानों को नियमित रूप से उत्पादन होता है।

प्राकृतिक तटस्थता के प्रति संवेदनशीलता:

पॉलीहाउस खेती प्राकृतिक तटस्थता को संरक्षित करने में मदद करती है। यह वनस्पतियों को संरक्षित माहौल में उगाने की विधि है, जिससे जमीन की खराबी और प्राकृतिक संतुलन को नुकसान नहीं पहुंचता है। इससे वनस्पतियों के उत्पादन में वृद्धि होती है और प्राकृतिक तटस्थता को संरक्षित करने में मदद मिलती है।

पॉलीहाउस के आर्थिक लाभ:

पॉलीहाउस खेती किसानों के आर्थिक विकास को बढ़ाती है। इसमें वनस्पतियों के सुरक्षित विकास के कारण उन्हें अधिक मुनाफा मिलता है और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारती है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है और वे अपने परिवार की आर्थिक संतुष्टि के साथ अधिक से अधिक उत्पादन कर सकते हैं।

सारांश

पॉलीहाउस खेती एक उत्कृष्ट खेती विधि है जो वनस्पतियों के उत्पादन में समृद्धि लाती है और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है। इसमें समय सारणी बनाना, स्थल चयन, उपयुक्त पादप का चयन, और प्राकृतिक तटस्थता की संरक्षा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। पॉलीहाउस खेती से विभिन्न सब्जियों, फूलों, और पौधों का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफा होता है और प्राकृतिक तटस्थता को संरक्षित करने में मदद मिलती है।

आज के आर्टिकल में हमने पॉलीहाउस खेती क्या है कैसे करे के बारे में, Polyhouse Farming kya hai, Polyhouse Farming kaise kare आदि के बारे में बात की है आशा करते है आपको आर्टिकल पसंद आया है। आपका कोई भी सवाल है तो आप कमेंट करके बता सकते है।

और जाने: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

FAQs

पॉलीहाउस खेती अन्य कृषि विधियों से किस प्रकार भिन्न है?

पॉलीहाउस खेती अन्य कृषि विधियों से इसलिए विभिन्न है क्योंकि इसमें वनस्पतियों को संरक्षित वातावरण में उगाया जाता है और उन्हें उचित तापमान, नमी, खाद, और सिंचाई के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है। इससे उनका विकास बेहतर होता है और उनसे अधिक मुनाफा होता है।

पॉलीहाउस खेती के लिए सबसे उपयुक्त पादप कौन से हैं?

पॉलीहाउस खेती के लिए सबसे उपयुक्त पादप वनस्पतियों के प्रकार और विकास अवस्था के अनुसार बदलते हैं। सब्जियों, फूलों, और पौधों को खेती करने के लिए उपयुक्त पादप होते हैं जो आपके क्षेत्र में प्रकाश, तापमान, और मौसम के अनुसार उगाए जा सकते हैं।

पॉलीहाउस खेती से एक बार में कितने उत्पादन किया जा सकता है?

पॉलीहाउस खेती से एक बार में उत्पादन की संख्या वनस्पतियों के प्रकार, उनके प्रवृत्ति अवधि, और मौसम के अनुसार भिन्न होती है। कुछ पादप एक ही समय में कई फसलों का उत्पादन कर सकते हैं जबकि कुछ केवल एक बार उत्पादन करते हैं। इसलिए, यह वर्षभर में किए जाने वाले पॉलीहाउस के प्रकार और पादप के अनुसार भिन्न होता है।

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