सरसों के भाव में आया उछाल देखें आज के सरसों भाव सभी मुख्य मंडीयो के क्या रहे

हमारे देश में खेती एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आर्थिक गतिविधि है, जो लाखों किसानों को रोजगार और आय का स्रोत प्रदान करती है। इसमें सरसों एक अहम फसल है जो भारत के विभिन्न भागों में उगाई जाती है। यह एक व्यापक बीजी फसल है जिससे तेल निकाला जाता है जो खाद्य उत्पादन और इंडस्ट्री में उपयोग होता है।

इस आर्टिकल में आज हम सरसों के भाव में आये उछाल के बारे में चर्चा करने वाले है तथा साथ ही हम सरसों के उत्पादन, मूल्य, उपयोग, और खेती संबंधित अन्य जानकारी प्रदान करेंगे।

सरसों के भाव में आया उछाल देखें आज के सरसों भाव सभी मुख्य मंडीयो के क्या रहे

आज के सरसों मंडी भाव क्या रहे –

सरसों की मंडीसरसों का भाव (प्रति क्विंटल)
सिरसा5890 – 6350 रूपए
जयपुर5860 – 6480 रूपए
दिल्ली6810 – 7630 रूपए
खुर्जा भाव6410 – 6820 रूपए
आगरा/शमशाबाद/दिगनेर7860 रूपए
अलवर सलोनी7960 रूपए
कोटा सलोनी7850+100 रूपए
आगरा बीपी7660+100 रूपए
आगरा शारदा7750 रूपए
गोयल कोटा7300 रूपए
बरवाला6770 रूपए
ग्वालियर6610-6710 रूपए
कोलकाता7410 रूपए
कानपुर6410 – 7200 रूपए
अडाणी विल्मर6600 – 7310 रूपए
टोंक6820 – 7410 रूपए
श्योपुर6420 – 7010 रूपए
पोरसा6260 – 6700 रूपए
अलवर6500 – 6950 रूपए
मुरैना मंडी6600 – 6970 रूपए
खैरथल6000 – 6690 रूपए
रुचि सोया बांरा6150 – 6710 रूपए
गंगानगर6250 – 6855 रूपए
गुना6090 – 6500 रूपए
नेवाई5980 – 6900 रूपए
टोंक6950 रूपए
आगरा बीपी7550 रूपए
आगरा शारदा7570 रूपए
कामां/कुम्हेर/नदबई/डीग6963 रूपए
हिसार कंडीशन6900 रूपए
हिसार6700 रूपए
भरतपुर6933 रूपए
मेड़ता7020 रूपए

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आज के सरसो भाव की जानकारी

  1. आगरा/शमशाबाद/दिगनेर: यह क्षेत्र सरसों की उच्च भाव के साथ प्रसिद्ध है। उच्च उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता के कारण यहां के सरसों की मांग भी बढ़ गई है। यहां के किसानों को सरकार के समर्थन योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है जो उन्हें उत्पादन में मदद कर रही हैं।
  2. अलवर सलोनी: अलवर जिले के इस क्षेत्र में सरसों की खेती में विशेषज्ञता है और यहां के सरसों की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट है। इस भाव के कारण यहां के किसान भी अच्छे उत्पादन कर रहे हैं और उन्हें अच्छा दाम मिल रहा है।
  3. कोटा सलोनी: कोटा के इस क्षेत्र में सरसों का उत्पादन काफी उच्च है, लेकिन वर्तमान में भाव कम होने के कारण किसानों को अधिक लाभ नहीं हो पा रहा है। यह भाव किसानों के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय को दर्शाता है जिसमें वे अधिकतर खासी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
  4. आगरा बीपी: आगरा के इस क्षेत्र में सरसों के भाव कम होने के कारण किसानों को अधिक परेशानी हो रही है। वे अपने उत्पादन को उच्च भाव पर नहीं बेच पा रहे हैं जिससे उन्हें आर्थिक समस्याएं हो रही हैं। सरकार को इस समस्या को समझकर किसानों की मदद करने की आवश्यकता है।

सरसों के उत्पादन

सरसों को प्राकृतिक रूप से कई भागों में भारत में उगाया जाता है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश भारत में सरसों के प्रमुख उत्पादन स्थल हैं। यह ठंडे मौसम की फसल होती है और मुख्य रूप से रबी वर्षा में बोई जाती है। यह तेजी से उगने वाली फसल है जिससे आप अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

सरसों के उपयोग

सरसों एक विशालकाय फसल होने के कारण इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है। इसके बीजों से तेल निकाला जाता है जो खाद्य उत्पादन में उपयोगी होता है, इसका अनुप्रयोग नहीं किया जा रहा है। सरसों का तेल खाने के लिए उपयोगी होता है और यह भारतीय रसोई में विभिन्न व्यंजनों में भी उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, सरसों के बीज वनस्पतियों और पशुओं के चारा के लिए भी उपयोगी होते हैं।

सरसों की खेती

सरसों की खेती एक व्यापक प्रक्रिया है जो किसानों को उचित ज्ञान और धैर्य की आवश्यकता है। यह फसल अच्छी खेती देने के लिए अनुकूल मौसम और मिट्टी की आवश्यकता होती है। सरसों की खेती में बीज से लेकर प्रकृतिक आयाम जैसे कीटनाशकों का उपयोग और समयबद्ध रोपण आवश्यक होते हैं। किसानों को सरसों की खेती में उचित देखभाल करने और उत्पादन में सुधार करने के लिए सरकार द्वारा कई समर्थन योजनाएं भी प्रदान की जाती हैं।

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संधारण और भविष्य की दिशा

अब तक हमने देखा है कि सरसों एक बहुत महत्वपूर्ण फसल है जो भारत में विभिन्न उपयोगों के लिए उगाई जाती है। इसके उत्पादन में सुधार करने के लिए और इसकी खेती को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए हमें नवीनतम तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। सरकार को भी इस फसल के उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को समर्थन प्रदान करने के लिए उचित योजनाएं बनानी चाहिए।

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